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चारा घोटाला: दुमका कोषागार केस में लालू दोषी, जगन्नाथ बरी, सजा पर 21 मार्च से सुनवाई

New Delhi News, 19 March   2018 ; ​ चारा घोटाला के दुमका मामले में सोमवार को फैसले का दिन है। सीबीआइ की की विशेष अदालत ने आज पूर्व मुख्‍यमंत्री डॉ. जगन्‍नाथ मिश्र को सहित 12 आरोपितों को बरी कर दिया, जबकि लालू प्रसाद यादव सहित शेष सभी को दोषी करार दिया गया। बीमारी की वजह से जगन्‍नाथ मिश्र ह्वील चेयर पर अदालत पहुंचे तो लालू प्रसाद को एंबुलेंस से अदालत लाए गए। लालू इसके पहले चारा घोटाला के तीन मामलों में दोषी करार दिए जा चुके हैं। वे रांची के होटवार जेल में सजा काट रहे हैं।  लालू को भारतीय दंड सहिता की जिन धाराओं में दोषी करार दिया गया है, वे गंभीर हैं। ऐसे में उन्‍हें बड़ी सजा की संभावना है। अब सजा के बिंदु पर 21 मार्च को सुनवाई होगी।  सियासी बयानबाजी का दौर शुरू  सभी आरोपितों को दोपहर 12 बजे तक हाजिर होन का निर्देश दिया गया था। अदालत परिसर व आसपास राजद समर्थकों की भीड़ जमा रही। लालू यादव को दोषी करार दिए जाने के बाद उनमें निराशा देखी गई। अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का आना भी जारी है।  राजद के राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि चारा घोटाला के एक ही तरह के मामले में जगन्‍नाथ मिश्र को राहत, लेकिन लालू को दोषी करार दिया गया है।  एंबुलेंस से अदालत लाए गए लालू  लालू प्रसाद यादव इन दिनों बीमार हैं। चारा घोटाला में फैसले को लेकर हाजिर होने के लिए लालू की ओर से आवेदन दाखिल किया गया कि उन्‍हें एंबुलेंस से अदालत लाने की अनुमति दी जाए। इसके बाद उन्‍हें एंबुलेंस से अदालत लाया गया।  दुमका कोषागार से जुड़ा है मामला  विदित हो कि तत्‍कालीन बिहार (अब झारखंड) के दुमका कोषागार से करीब 3.76 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले में दर्ज मुकदमा नंबर आरसी 38ए/96 में लालू प्रसाद यादव, डॉ. जगन्‍नाथ मिश्र, पूर्व सांसद डॉ. आरके राणा व जगदीश शर्मा सहित कुल 31 आरोपी हैं। इस मामले में लालू प्रसाद यादव सहित अन्य पर धोखाधड़ी और अन्‍य धाराओं में मुकदमा दर्ज है। इस मामले में सीबीआइ कोर्ट ने पांच मार्च को सुनवाई पूरी की थी।  लालू यादव पर ये हैं आरोप  इस मामले में लालू यादव पर 96 फर्जी वाउचर के जरिए दिसंबर 1995 से जनवरी 1996 के बीच दुमका कोषागार से 3.76 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप है। ये पैसे जानवरों के खाने के सामान, दवाओं और कृषि उपकरण के वितरण के नाम पर निकाले गए थे। उस दौरान पैसे के आवंटन की सीमा अधिकतम एक लाख 50 हजार ही थी। जब यह निकासी हुई थी लालू उस समय मुख्यमंत्री थे। काननू विशेषज्ञों की राय में लालू पर जिन धाराओं में आरोप लगे हैं, अगर दोष सिद्ध हो गया तो उन्‍हें 10 साल की सजा हो सकती है।  तीन मामलों में हो चुकी सजा  लालू यादव चारा घोटाला में दर्ज मामलों में अबतक तीन में दोषी ठहराए जा चुके हैं। लालू को चाईबासा कोषागार के दो मामलों मामले में पांच-पांच साल तथा देवघर कोषागार मामले में साढ़े तीन साल की सजा मिल चुकी है। दुमका कोषागार में घोटाला मामले में सजा का एलान आज होना था। डोरंडा कोषागार से जुड़ा चारा घोटाले का पांचवा मामला सबसे बड़ा है, जिसमें करीब 139.35 करोड़ की अवैध निकासी का आरोप है।  फिलहाल रांची जेल में सजा काट रहे लालू  फिलहाल वे रांची के होटवार सेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं। सुप्रीम कोर्अ के आदेशानुसार चारा घोटाला में लगातार तेज सुनवाई हो रही है। इसी का नजीजा है कि चारा घोटाला के मामलों में एक के बाद एक लगाातर फैसले आ रहे हैं।  इन 31 अभियुक्तों पर आया फैसला  - लालू प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री : दोषी  - डॉ. जगन्नाथ मिश्रा, पूर्व मुख्यमंत्री : बरी  - ध्रुव भगत, तत्कालीन अध्यक्ष, लोक लेखा समिति : बरी  - डॉ. आरके राणा, पूर्व सांसद : बरी  - जगदीश शर्मा, तत्कालीन अध्यक्ष लोक लेखा समिति : बरी  - विद्यासागर निषाद, पूर्व मंत्री : बरी  - अधीप चंद्र चौधरी, कमिश्नर आइटी : बरी  - अरुण कुमार सिंह, पार्टनर विश्वकर्मा एजेंसी: दोषी  -अजित कुमार शर्मा, प्रोपराइटर लिटिल ओक : दोषी  -विमल कांत दास, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर : दोषी  - बेक जूलियस, तत्कालीन सचिव :  - बेनू झा, प्रोपराइटर लक्ष्मी इंटरप्राइजेट :  -गोपी नाथ दास, प्रोपराइटर, राधा फार्मेसी :  - केके प्रसाद, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर :  - लाल मोहन प्रसाद, प्रोपराइटर आरके एजेंसी : बरी  - मनोरंजन प्रसाद, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर : दोषी  - एमसी सुवर्णों, तत्कालीन डिविजनल कमिश्नर : बरी  - महेश प्रसाद, तत्कालीन सचिव  - एमएस बेदी, प्रोपराइटर सेमेक्स क्रायोजेनिक्स  - नरेश प्रसाद, प्रोपराइटर वायपर कुटीर  - नंद किशोर प्रसाद, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर  -ओपी दिवाकर, तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक : दोषी  - पंकज मोहन भुई, तत्कालीन एकाउंटेंट  - पितांबर झा, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर  -पीसी सिंह, तत्कालीन सचिव  - रघुनाथ प्रसाद, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर  - राधा मोहन मंडल, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर  -राजकुमार शर्मा, ट्रांसपोर्टर : दोषी  - आरके बगेरिया, ट्रांसपोर्टर  - सरस्वती चंद्रा, प्रोपराइटर, एसआर इंटरप्राइजेज  - एसके दास, तत्कालीन असिस्टेंट




Pradeep